Saturday, June 28, 2008

मह्त्वपूर्ण क्या है ??

आइये आज हम बातें करें समस्याओं की
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आप की भी कोई न कोई समस्या रही होगी या अभी भी होगी या आने वाली होगी
इस धरातल पर भांति भांति के लोग रहते हैं
आइये हम लोग मिल जुल कर लोगों का वर्गीकरण उनकी समस्याओं के आधार पर करते हैं।
  • व्यक्ति जो अपनी वर्तमान की समस्याओं से जूझ रहा है
  • व्यक्ति जो अपनी बीती समस्याओं से जूझ रहा है
  • व्यक्ति जो आने वाली समस्याओं में खोया हुआ है
  • दूसरों की समस्याओं के समाधान में लगा हुआ

मैं यह नहीं जानता की आप किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं पर मुझे पता है की हम सभी एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं ।

बाकी बातें कल करेंगे....

Thursday, May 22, 2008

राष्ट्र कैसा हो?

एक प्रश्न है मेरे पास , अपना देश कैसा हो ? बहुत पैसा हो, अमन-चैन हो । क्या हो अपने देश में? सब के अपने अपने विचार होंगे ,पर जहां तक मेरा मानना है की हमारे राष्ट्र के लोग शक्तिशाली हों। अपने राष्ट्र में कमजोर लोग कम से कम हों। मैं यह नहीं कह रहा हूँ की सारे लोग शारीरिक रूप से शक्तिशाली हों पर ये बात तो जरूर हो की कोई कमजोर नहीं हो।
मेरे मन में एक राष्ट्र की कल्पना है जो उर्जा के क्षेत्र में धनी हो॥
वो उर्जा जो भी हो...
:-) मानव की शारीरिक शक्ति के रूप में हो
:-) मानव की मानसिक शक्ति हो
:-) अध्यात्मिक शक्ति हो
:-) मानव की सामरिक शक्ति हो मतलब राष्ट्र की सामरिक शक्ति
:-) हर प्रकार की उर्जा जो राष्ट्र को आगे ले जाए
फिर अगर अपने देश का मानव स्वस्थ हो, दृढ़ निश्चयी हो तो बाकी सारी तरह की उर्जा की प्राप्ति हो सकती है।
जहां तक मानव के स्वस्थ होने की बात है इस के लिए हमें ,यानी हमारे राष्ट्र को क्या करना होगा॥
मैं चाहता हूँ की इस प्रश्न का उत्तर आप की तरफ से आए

(धन्यबाद)
सादर
मुकुल

Sunday, May 18, 2008

http://savesuraj.blogspot.com/

कृपया इस ब्लॉग को पढे एवं यथा-सम्भव मदद करें।
ये आप सभी लोगों से मेरी गुजारिश हैं।
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ये सूरज है । इस सूरज के पास ७ घोड़े नहीं हैं। इस के पास एक भी घोड़ा नही है। क्या कर रहे हैं आप इस सूरज के लिए । इस सूरज के लिए कुछ घोड़े की तलाश है। आइये हम इस शुभ कार्य में मदद करें। सूरज के जीवन को राहू-केतु ने ग्रस लिया है। इस असमय सूर्य ग्रहण को दूर करना है। वैसे आसमान पे बादल छाए हैं पर आशा के इस सूरज को बचाना है और आप से हमारी गुजारिश हैं सविनय निवेदन कृपया मदद करिये ,
बस इतना ही कहना चाहता हूँ।
दोस्तों , एक माँ को उसका पुत्र मिलेगा, किसी को नया जीवन मिलेगा क्या आप को खुशी नहीं होगी?

वक्त की तकदीर

बदलते वक्त की तक़दीर हो तुम । आने वाले कल की तस्वीर हो तुम । जो कभी नहीं हुआ है गुम , हवाओं, में वो अचूक तीर हो तुम। बदलते वक्त की तक़दीर हो तुम। काट दे जो बाधाओं की जंजीर, वो शमशीर हो तुम । माना की चलना नहीं सिखा है तुम ने , फिर भी , इश्वर के मुखबिर हो तुम । भाग्य की रेखाओं से दूर कर्म की सब से बड़ी लकीर हो तुम । कोई माने या न माने , सब से बड़े फकीर हो तुम। बदलते वक्त की तकदीर हो तुम।

(मुकुल)

Thursday, May 15, 2008

कौन छोटा कौन बड़ा

एक आदमी था वो बहुत ही छोटे कद का था लोग उसे छोटू छोटू बोलते थे साब उसकी लम्बाई का मजाक उड़ा थे एक दिन कुछ ऐसा हुआ की वो एक बहुत ऊँचे पहाड़ पर चढ़ गया फिर वो क्या देखता है की सब कुछ बहुत छोटे छोटे नजर आ रहे हैं । फिर उस ने सोंचा की कौन छोटा कौन बड़ा
(~मुकुल)

वो लोग जिंदा नहीं हैं.

जिनके विचारों में धार नहीं हैं
जिनके विचारों में शान नही हैं
वो जिंदा कहाँ हैं
जहां बहती नहीं नए विचारों की सरिता
अगर आप के आस पास है बस छोटा सा तालाब
तो लगी चुकी है आप के विचारों को ज़ंग
और दुनिया को ज़ंग लगे औजारों की कोई जरूरत नही है
तो वो लोग जिंदा नही हैं
जिनके विचारों में शान नही हैं
तीव्रता नही है
वो मर चुके हैं
जिंदा हो कर भी
वो लोग जिंदा नही है

भारत की अमीरी भाग -१

तो मैं कह रहा था की ये जो भारत की अमीरी मुझे थोड़ी सी क्षणभंगुर सी लग रही है। शायद मैं नकारात्मक बातें कर रहा हूँ पर ये बात मैं काफी सोच विचार कर कह रहा हूँ । जो भारत की मूल भूत संरचना हें वही कमजोर हो रही है जो भारत की रीढ़ की हड्डी हैं जो भारत के विकास के शिल्पी हैं वो आज भूख मरी के शिकार है । ये अमीरी और गरीबी के बीच की जो खाई है वो बढ़ती जा रही है तो आगे क्या होगा ? एक युद्ध एक क्रांति
इस नकारात्मक व्यवस्था के विरुद्ध !
फैलेगी एक अराजकता या नहीं तो फिर होगा राष्ट्र गुलाम
(आगे जारी रहेगा)

About Me

मैं एक ऐसा व्यक्ति हूँ जो सोचता बहुत हूँ पर करता कुछ भी नहीं हूँ. इस से अच्छा मेरा परिचय कुछ भी नहीं हो सकता है मैं खयालों की दुनिया में जीने वाला इन्सान हूँ . सच्चाई के पास रह कर भी दूर रहने की कोशिश करता हूँ अगर सच्चाई के पास रहूँगा तो शायद चैन से नहीं रह पाउँगा पर हर घड़ी सत्य की तलाश भी करता रहता हूँ . शायद आप को मेरी बातें विरोधाभाषी लग रही होगी पर सच्चाई यही हैं.. ये बात सिर्फ मुझ पर हीं नहीं लागू होती है शायद हम में से ज्यादातर लोगों पर लागू होती है. मैं तो गांव में पला -बढा ,शहर की बारीकियों से अनजान इक गंवई इन्सान हूँ जिसे ज्यादातर शहर के तौर तरीके पता नहीं हैं.